“मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे इतना दिया मेरी माता” माँ दुर्गा को समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण भजन है। इस भजन में भक्त माता रानी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता है और बताता है कि माँ ने उसकी झोली खुशियों से इतनी भर दी है कि वह छोटी पड़ गई है।
इस भजन में माँ की असीम कृपा, दया और संरक्षण का सुंदर वर्णन मिलता है। भक्त अपने जीवन के हर सुख-दुख का श्रेय माँ को देता है और स्वीकार करता है कि उसकी हर सफलता और खुशी माँ की कृपा से ही संभव हुई है।
यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण और भजन संध्या में गाया जाता है।

मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे लिरिक्स
मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे,
इतना दिया मेरी माता ।
मेरी बिगड़ी माँ ने बनायीं,
सोयी तकदीर जगायी,
ये बात ना सुनी सुनाई,
मैं खुद बीती बतलाता रे,
इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे इतना दिया मेरी माता ॥
मान मिला सम्मान मिला,
गुणवान मुझे संतान मिली,
धन धान मिला नित ध्यान मिला,
माँ से ही मुझे पहचान मिली
घरबार दिया मुझे माँ ने,
बेशुमार दिया मुझे माँ ने,
हर बार दिया मुझे माँ ने,
जब जब मैं माँगने जाता मुझे इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़ गई रे इतना दिया मेरी माता ॥
मेरा रोग कटा मेरा कष्ट मिटा,
हर संकट माँ ने दूर किया,
भूले से कभी जो गुरुर किया,
मेरे अभिमान को चूर किया,
मेरे अंग संग हुई सहाई,
भटके को राह दिखाई,
क्या लीला माँ ने रचाई,
मैं कुछ भी समझ ना पाता इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़ गई रे इतना दिया मेरी माता ॥
उपकार करे भव पार करे,
सपने सब के साकार करे,
ना देर करे माँ मेहर करे,
भक्तो के सदा भंडार भरे,
महिमा निराली माँ की,
दुनिया है सवाली माँ की,
जो लगन लगा ले माँ की,
मुश्किल में नहीं घबराता रे इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़ गई रे इतना दिया मेरी माता ॥
कर कोई जतन ऐ चंचल मन,
तू होके मगन चल माँ के भवन,
पा जाये नयन पावन दर्शन,
हो जाये सफल फिर ये जीवन,
तू थाम ले माँ का दामन,
ना चिंता रहे ना उलझन,
दिन रात मनन कर सुमिरन,
चाकर माँ कहलाता इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़ गई रे इतना दिया मेरी माता ॥
मेरी झोली छोटी पड़ गई रे,
इतना दिया मेरी माता।
मेरी बिगड़ी माँ ने बनायीं,
सोयी तकदीर जगायी,
ये बात ना सुनी सुनाई,
मैं खुद बीती बतलाता रे,
इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे इतना दिया मेरी माता ॥
भावार्थ (सरल शब्दों में)
इस भजन में भक्त कहता है कि माँ ने उसकी बिगड़ी हुई तकदीर बना दी और उसे जीवन में मान-सम्मान, सुख-समृद्धि और संतोष दिया। माँ ने उसके दुख दूर किए और हर संकट में उसकी रक्षा की।
भजन यह भी बताता है कि जब-जब भक्त ने माँ से कुछ माँगा, माँ ने उसे उससे भी अधिक दिया। यहाँ तक कि कभी-कभी भक्त अपनी समझ से बाहर माँ की कृपा को अनुभव करता है।
माँ न केवल दुख दूर करती हैं, बल्कि सही रास्ता भी दिखाती हैं और अहंकार को भी दूर करती हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि जो भी सच्चे मन से माँ की शरण में जाता है, उसकी झोली माँ अपनी कृपा से भर देती हैं।
FAQ – मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे भजन
1. यह भजन किस देवी को समर्पित है?
यह भजन माँ दुर्गा / माता रानी को समर्पित है।
2. यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण और भजन संध्या में गाया जाता है।
3. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का संदेश है कि माँ की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
4. इस भजन में “झोली छोटी पड़ गई” का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि माँ ने भक्त को इतनी कृपा दी कि वह उसे संभाल नहीं पा रहा, यानी कृपा असीम है।
5. इस भजन को सुनने से क्या लाभ होता है?
इस भजन से मन में श्रद्धा, कृतज्ञता और सकारात्मकता का भाव बढ़ता है।
निष्कर्ष
“मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे इतना दिया मेरी माता” भजन माँ की असीम कृपा और प्रेम का अद्भुत चित्रण करता है। यह हमें सिखाता है कि जब हम सच्चे मन से माँ का स्मरण करते हैं, तो वे हमारी हर इच्छा पूरी करती हैं और हमारे जीवन को खुशियों से भर देती हैं।