“मंगल की सेवा सुन मेरी देवा” माँ दुर्गा और काली को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय आरती है। इस आरती में भक्त माता के चरणों में हाथ जोड़कर प्रार्थना करता है और उनसे अपने जीवन के कष्ट दूर करने तथा मंगल करने की विनती करता है।
आरती में माता को जगदम्बा, काली, भवानी और जगत की पालनहार कहा गया है। इसमें यह भी वर्णन है कि जब-जब भक्तों पर संकट आया, तब-तब माँ ने उनकी रक्षा की और दुष्टों का संहार किया। यह आरती माँ की करुणा, शक्ति और दया का सुंदर चित्रण करती है।
यह आरती विशेष रूप से नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण और दैनिक पूजा में श्रद्धा से गाई जाती है।

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा लिरिक्स
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा,
हाथ जोड तेरे द्वार खडे ।
पान सुपारी ध्वजा नारियल,
ले ज्वाला तेरी भेट धरे ।
सुन जगदम्बे न कर विलम्बे,
संतन के भडांर भरे ।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जय काली कल्याण करे ॥
बुद्धि विधाता तू जग माता,
मेरा कारज सिद्व करे ।
चरण कमल का लिया आसरा,
शरण तुम्हारी आन पडे ।
जब-जब भीड पडी भक्तन पर,
तब-तब आप सहाय करे ।
संतन प्रतिपाली सदा खुशाली,
जय काली कल्याण करे ॥
गुरु के वार सकल जग मोहयो,
तरुणी रूप अनूप धरे ।
माता होकर पुत्र खिलावे,
कही भार्या भोग करे ।
शुक्र सुखदाई सदा सहाई,
संत खडे जयकार करे ।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जै काली कल्याण करे ॥
ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिये,
भेट देन तेरे द्वार खडे ।
अटल सिहांसन बैठी मेरी माता,
सिर सोने का छत्र फिरे ।
वार शनिचर कुमकुम बरणो,
जब लुंकड़ पर हुकुम करे ।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशाली,
जै काली कल्याण करे ॥
खड्ग खप्पर त्रिशुल हाथ लिये,
रक्त बीज को भस्म करे ।
शुम्भ-निशुम्भ को क्षण में मारे,
महिषासुर को पकड दले ।
आदित वारी आदि भवानी,
जन अपने को कष्ट हरे ।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जै काली कल्याण करे ॥
कुपित होकर दानव मारे,
चण्ड-मुण्ड सब चूर करे ।
जब तुम देखी दया रूप हो,
पल में सकंट दूर करे ।
सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता,
जन की अर्ज कबूल करे ।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जै काली कल्याण करे ॥
सात बार की महिमा बणनी,
सब गुण कौन बखान करे ।
सिंह पीठ पर चढी भवानी,
अटल भवन में राज्य करे ।
दर्शन पावे मंगल गावे,
सिद्ध साधक तेरी भेट धरे ।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जै काली कल्याण करे ॥
ब्रह्मा वेद पढे तेरे द्वारे,
शिव शंकर हरी ध्यान धरे ।
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती,
चंवर कुबेर डुलाय रहे ।
जय जननी जय मातु भवानी,
अटल भवन में राज्य करे ।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जय काली कल्याण करे ॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा,
हाथ जोड तेरे द्वार खडे ।
पान सुपारी ध्वजा नारियल,
ले ज्वाला तेरी भेट धरे ॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा,
हाथ जोड तेरे द्वार खडे ।
पान सुपारी ध्वजा नारियल,
ले ज्वाला तेरी भेट धरे ॥
भावार्थ (सरल शब्दों में)
इस आरती में भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वह उसके मंगल कार्यों को सफल करें और उसके जीवन में सुख-शांति प्रदान करें। भक्त हाथ जोड़कर माता के द्वार पर खड़ा है और पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल जैसे भेंट अर्पित करता है।
आरती में बताया गया है कि माँ जगदम्बा सदा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और जब भी भक्त संकट में पड़ते हैं, माँ तुरंत उनकी सहायता करती हैं। उन्होंने कई दानवों का संहार किया और संसार में धर्म की रक्षा की।
माँ का रूप कभी सौम्य और करुणामयी है तो कभी दुष्टों का विनाश करने वाला उग्र स्वरूप। जो भी भक्त सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, माँ उसकी प्रार्थना अवश्य सुनती हैं और उसके जीवन के दुख दूर करती हैं।
FAQ – मंगल की सेवा सुन मेरी देवा आरती
1. यह आरती किस देवी को समर्पित है?
यह आरती माँ दुर्गा, काली और भवानी के स्वरूप को समर्पित है।
2. यह आरती कब गाई जाती है?
यह आरती नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण और दैनिक पूजा के समय गाई जाती है।
3. इस आरती का मुख्य संदेश क्या है?
इस आरती का संदेश है कि माँ जगदम्बा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उनके सभी कष्ट दूर करती हैं।
4. आरती में किन दानवों का उल्लेख है?
आरती में महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ और चण्ड-मुण्ड जैसे दानवों का उल्लेख मिलता है जिन्हें माँ ने पराजित किया।
5. इस आरती को गाने से क्या लाभ होता है?
इस आरती को गाने से मन में श्रद्धा बढ़ती है, भय दूर होता है और माँ की कृपा प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
“मंगल की सेवा सुन मेरी देवा” आरती माँ दुर्गा की महिमा और शक्ति का सुंदर वर्णन करती है। यह भक्त को विश्वास दिलाती है कि जब भी जीवन में संकट आता है, माँ जगदम्बा अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहती हैं। सच्चे मन से की गई प्रार्थना और भक्ति से माँ की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।