भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे लिरिक्स, Bhor Bhai Din Chad Gaya Meri Ambe Lyrics

“भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे” माता रानी की अत्यंत लोकप्रिय आरती है, जिसे विशेष रूप से सुबह के समय मंदिरों और घरों में श्रद्धा के साथ गाया जाता है। इस आरती में भक्त माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों — दरबार वाली, पहाड़ों वाली, पिंडी रानी और त्रिकुटा रानी — का स्मरण करते हुए उनकी महिमा का गुणगान करता है।

भोर होते ही मंदिरों में गूंजती जय-जयकार, जलती हुई ज्योत और आरती की पवित्र धुन भक्तों के मन को भक्ति और शांति से भर देती है। यह आरती माँ के प्रति समर्पण, श्रद्धा और विश्वास का सुंदर प्रतीक है।

यह आरती विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी और दैनिक पूजा में गाई जाती है।

Bhor Bhai Din Chad Gaya Meri Ambe Lyrics

भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे लिरिक्स


भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे,
हो रही जय जय कार मंदिर विच आरती जय माँ ॥

हे दरबारा वाली आरती जय माँ ।
ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥

काहे दी मैया तेरी आरती बनावा,
काहे दी पावां विच बाती,
मंदिर विच आरती जय माँ ॥

सुहे चोलेयाँ वाली आरती जय माँ ।
हे माँ पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥

सर्व सोने दी आरती बनावा,
अगर कपूर पावां बाती,
मंदिर विच आरती जय माँ ॥

हे माँ पिंडी रानी आरती जय माँ ।
हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥

कौन सुहागन दिवा बालेया मेरी मैया,
कौन जागेगा सारी रात,
मंदिर विच आरती जय माँ ॥

सच्चिया ज्योतां वाली आरती जय माँ ।
हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥

सर्व सुहागिन दिवा बलिया मेरी अम्बे,
ज्योत जागेगी सारी रात,
मंदिर विच आरती जय माँ ॥

हे माँ त्रिकुटा रानी आरती जय माँ ।
हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥

जुग जुग जीवे तेरा जम्मुए दा राजा,
जिस तेरा भवन बनाया,
मंदिर विच आरती जय माँ ॥

हे मेरी अम्बे रानी आरती जय माँ ।
हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ ॥

सिमर चरण तेरा ध्यानु यश गावे,
जो ध्यावे सो, यो फल पावे,
रख बाणे दी लाज,
मंदिर विच आरती जय माँ ॥

सोहनेया मंदिरां वाली आरती जय माँ ॥



भावार्थ (सरल शब्दों में)


इस आरती में भक्त माँ अम्बे से पूछता है कि वह किस प्रकार उनकी आरती सजाए और किस प्रकार दीप जलाए, क्योंकि माँ की महिमा अनंत है। भक्त सोने की आरती, कपूर की बाती और अखंड ज्योत के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करता है।

आरती में बताया गया है कि माँ की ज्योत पूरी रात जलती रहती है और जो भी सच्चे मन से उनका ध्यान करता है, उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है। माँ को पहाड़ों की रानी, पिंडी स्वरूप और त्रिकुटा देवी के रूप में याद किया गया है, जो अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उनकी लाज रखती हैं।

यह आरती हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति बाहरी सजावट से नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास से होती है।

FAQ – भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे आरती


1. यह आरती कब गाई जाती है?

यह आरती प्रातःकाल, नवरात्रि, माता की चौकी और जागरण में गाई जाती है।

2. यह आरती किस देवी को समर्पित है?

यह आरती माँ अम्बे/दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को समर्पित है।

3. आरती में “पहाड़ा वाली” किसे कहा गया है?

यह माता वैष्णो देवी के स्वरूप का उल्लेख है, जो पर्वतों में विराजमान हैं।

4. इस आरती का मुख्य संदेश क्या है?

इस आरती का संदेश है कि श्रद्धा, भक्ति और सच्चे मन से की गई पूजा से माँ की कृपा प्राप्त होती है।

5. इस आरती को गाने से क्या लाभ होता है?

इस आरती से मन शांत होता है, भय दूर होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

निष्कर्ष


“भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे” आरती भक्त और माँ के बीच प्रेम और विश्वास का सुंदर संवाद है। सुबह के समय इस आरती का गायन मन को पवित्र करता है और दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। जो भक्त सच्चे मन से माँ का स्मरण करता है, उसकी हर मनोकामना माँ अवश्य पूर्ण करती हैं।
Previous Post Next Post