एक दिन वो भोले भंडारी लिरिक्स, Ek Din Vo Bhole Bhandari Lyrics

“एक दिन वो भोले भंडारी” एक अत्यंत अनोखा और भावनात्मक भजन है, जिसमें भगवान शिव की बाल-सुलभ जिज्ञासा, भक्ति और लीला का सुंदर चित्रण मिलता है। इस भजन में बताया गया है कि कैसे भोलेनाथ, माता पार्वती के साथ ब्रज की रासलीला देखने की इच्छा रखते हैं और नारी रूप धारण कर वृंदावन पहुँच जाते हैं।

यह भजन शिव और श्रीकृष्ण के बीच के गहरे आध्यात्मिक संबंध को दर्शाता है। जहाँ शिव वैराग्य और तपस्या के प्रतीक हैं, वहीं कृष्ण प्रेम और रस के स्वरूप हैं। इस भजन में दोनों का मिलन भक्तों को आनंद और भक्ति रस से भर देता है।

यह भजन विशेष रूप से भजन संध्या, होली महोत्सव, कृष्ण-शिव लीला प्रसंग और सत्संग में गाया जाता है।

Ek Din Vo Bhole Bhandari Lyrics

एक दिन वो भोले भंडारी लिरिक्स


एक दिन वो भोले भंडारी,
बनकर ब्रज की नारी,
गोकुल में आ गए हैं।
पार्वती ने मना किया पर,
ना माने त्रिपु रारी,
वृन्दावन आ गए हैं॥

पार्वती जी से बोले,
मैं भी चलूँगा तेरे संग में,
राधा संग श्याम नाचे,
मैं भी नाचूँगा तेरे संग में।
रास रचेगा ब्रज में भारी,
मुझे दिखाओ प्यारी,
वृन्दावन आ गए हैं॥

ओ मेरे भोले स्वामी,
कैसे ले जाऊं तुम्हें साथ में,
मोहन के शिवा वहां,
पुरुष ना जाए कोई रास में।
हंसी करेगी ब्रज की नारी,
मानो बात हमारी,
वृन्दावन आ गए हैं॥

ऐसा सजा दो मुझे,

कोई ना जाने इस राज को,
मैं हूँ सहेली तेरी,
ऐसा बताना ब्रज राज को,
बना के जुड़ा पहन के साड़ी,
चाल चले मतवाली,
वृन्दावन आ गए हैं॥

देखा मोहन ने ऐसा,
समझ गये वो सारी बात जी,
ऐसी बजाई बंसी,
सुध बुध भूले भोलेनाथ जी,
खिसक गयी जब सर से साड़ी,
मुस्काये गिरधारी,
वृन्दावन आ गए हैं॥

एक दिन वो भोले भंडारी,
बनकर ब्रज की नारी,
गोकुल में आ गए हैं।
पार्वती ने मना किया पर,
ना माने त्रिपु रारी,
वृन्दावन आ गए हैं॥



भावार्थ (सरल शब्दों में)


इस भजन में बताया गया है कि एक दिन भोलेनाथ ब्रज की रासलीला देखने की इच्छा करते हैं। माता पार्वती उन्हें समझाती हैं कि रास में केवल स्त्रियाँ ही प्रवेश कर सकती हैं, लेकिन भोलेनाथ अपने बाल भाव में नारी रूप धारण कर वृंदावन पहुँच जाते हैं।

वे साड़ी पहनते हैं, जूड़ा बनाते हैं और गोपियों की तरह रास में सम्मिलित होते हैं। श्रीकृष्ण सब कुछ समझ जाते हैं और ऐसी मधुर बंसी बजाते हैं कि भोलेनाथ स्वयं को भूल जाते हैं। जब उनके सिर से साड़ी खिसकती है, तब कृष्ण मुस्कुरा देते हैं।

इस लीला से यह संदेश मिलता है कि ईश्वर के लिए न कोई रूप बड़ा है न छोटा, न स्त्री न पुरुष। भक्ति और प्रेम ही सबसे बड़ा भाव है। शिव का यह रूप उनकी सरलता, निष्कपटता और बाल-भाव को दर्शाता है।

FAQ – एक दिन वो भोले भंडारी भजन


1. यह भजन किस कथा पर आधारित है?

यह भजन भगवान शिव के नारी रूप धारण कर ब्रज की रासलीला देखने की पौराणिक कथा पर आधारित है।

2. इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव है भक्ति, जिज्ञासा, प्रेम और शिव-कृष्ण का दिव्य मिलन।

3. यह भजन कब गाया जाता है?

यह भजन भजन संध्या, होली उत्सव, रासलीला प्रसंग और सत्संग में गाया जाता है।

4. इस भजन से क्या सीख मिलती है?

यह भजन सिखाता है कि ईश्वर के लिए रूप, वेश या मर्यादा से अधिक भाव और प्रेम महत्वपूर्ण होते हैं।

5. शिव और कृष्ण का संबंध क्या दर्शाता है?

यह भजन दर्शाता है कि शिव और कृष्ण अलग-अलग होकर भी एक ही परम सत्य के रूप हैं।

निष्कर्ष


“एक दिन वो भोले भंडारी” केवल एक भजन नहीं, बल्कि शिव और कृष्ण की दिव्य लीला का आनंदमय चित्रण है। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति में कोई बंधन नहीं होता — जहाँ प्रेम और समर्पण हो, वहीं ईश्वर स्वयं प्रकट हो जाते हैं। शिव का यह सरल और बाल भाव भक्तों के हृदय को श्रद्धा और आनंद से भर देता है।
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