“कान्हा आजा ब्रज में रंग बरसे” एक अत्यंत मधुर और उल्लास से भरा कृष्ण होली भजन है, जिसमें ब्रजभूमि की होली, राधा-कृष्ण की प्रेमलीला और रंग-गुलाल की मस्ती का सुंदर चित्रण मिलता है। यह भजन भक्तों के हृदय में वही आनंद जगा देता है, जो फागुन के दिनों में वृंदावन और बरसाने की गलियों में महसूस किया जाता है।
इस भजन में ब्रज की गोपियाँ अपने प्रिय कान्हा को पुकारती हैं कि वे ब्रज आएँ, क्योंकि यहाँ रंग बरस रहे हैं, प्रेम बरस रहा है और हर दिशा में होली का उत्सव छाया हुआ है। यह भजन भक्ति के साथ-साथ आनंद, प्रेम और उत्सव का भाव भी जागृत करता है।
यह भजन विशेष रूप से फागुन मास, होली महोत्सव, रासलीला और भजन संध्या में गाया जाता है।

कान्हा आजा ब्रज में रंग बरसे लिरिक्स
कान्हा आजा ब्रज में रंग बरसे,
हम खेलेगे होली दोनों जने ।।
कान्हा नन्द गाँव तो दूर घना,
बरसाने मिलेगे दोनों जने,
कान्हा आजा ब्रज में रंग बरसे।।
कान्हा बदले ल्युंगी गिण गिणके,
तूने नैन रुलाये बहोत घने,
कान्हा आजा ब्रज में रंग बरसे।।
कान्हा सारी सखियाँ बाट मैं,
हम प्रेमी हमजोली दोनों जने ,
कान्हा आजा ब्रज में रंग बरसे।।
कान्हा फागुन महीना रंग भरा,
मन का कमल खिलावे दोनों जने,
कान्हा आजा ब्रज में रंग बरसे।।
भावार्थ (सरल शब्दों में)
इस भजन का भाव यह है कि ब्रजभूमि राधा-कृष्ण के प्रेम से सराबोर है और होली के रंग चारों ओर बिखरे हुए हैं। गोपियाँ अपने प्रिय कान्हा से आग्रह करती हैं कि वे ब्रज आएँ और उनके साथ होली खेलें। रंग केवल गुलाल के नहीं हैं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद के भी हैं।
भजन यह दर्शाता है कि कृष्ण के बिना ब्रज अधूरा है। जब कान्हा आते हैं, तभी होली पूर्ण होती है। यह होली सांसारिक नहीं, बल्कि आत्मिक है, जहाँ भक्त अपने मन के रंग कृष्ण को अर्पित करता है।
यह भजन हमें सिखाता है कि
भक्ति भी उत्सव हो सकती है,
ईश्वर से प्रेम में आनंद छिपा है,
और जीवन को रंगों की तरह हँसते-खेलते जीना चाहिए।
FAQ – कान्हा आजा ब्रज में रंग बरसे भजन
1. यह भजन किस विषय पर आधारित है?
यह भजन राधा-कृष्ण की ब्रज होली और प्रेमलीला पर आधारित है।
2. यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन फागुन माह, होली उत्सव, रासलीला और कृष्ण भजन संध्या में गाया जाता है।
3. इस भजन का मुख्य भाव क्या है?
इस भजन का मुख्य भाव प्रेम, भक्ति, आनंद और उत्सव है।
4. इस भजन से क्या अनुभूति होती है?
इस भजन से मन प्रसन्न होता है, भक्ति का रस बढ़ता है और ब्रज की होली का आनंद महसूस होता है।
5. यह भजन हमें क्या सिखाता है?
यह भजन सिखाता है कि ईश्वर से जुड़ाव आनंद और प्रेम से होना चाहिए, न कि केवल औपचारिकता से।
निष्कर्ष
“कान्हा आजा ब्रज में रंग बरसे” भजन भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम है। यह हमें याद दिलाता है कि जब जीवन में प्रेम और भक्ति के रंग घुल जाते हैं, तब हर दिन होली बन जाता है। यह भजन मन को आनंद से भर देता है और कृष्ण प्रेम में डुबो देता है।