सो दुख कैसा पावे भजन लिरिक्स | Jaya Kishori Ji Bhajan | भावार्थ सहित

“सो दुख कैसा पावे” एक अत्यंत भावपूर्ण और आत्मिक शांति देने वाला भजन है, जिसे जया किशोरी जी की मधुर वाणी ने विशेष पहचान दिलाई है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि जब व्यक्ति पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ ईश्वर की शरण में चला जाता है, तो उसके जीवन में किसी भी प्रकार का दुख टिक नहीं सकता।

इस भजन में भगवान को पालनहार, रक्षक और कृपालु स्वामी के रूप में दर्शाया गया है। भजन का भाव इतना गहरा है कि सुनने वाला अपने आप को प्रभु की शरण में समर्पित महसूस करने लगता है। यह भजन मन को शांति, धैर्य और विश्वास प्रदान करता है।

सो दुख कैसा पावे भजन लिरिक्स

सो दुख कैसा पावे भजन लिरिक्स


जिसके सिर ऊपर तू स्वामी
सो दुख कैसा पावे
जिसके सिर ऊपर तू स्वामी
सो दुख कैसा पावे

तेरी शरण च जो कोई आवे
सब दे कष्ट तू आप मिटावे
तेरी शरण च जो कोई आवे
सब दे कष्ट तू आप मिटावे
किरपा सब ते आप बनावे

सदा सुखी वसे ओह प्राणी
सत दा नाम जो गावे
जिसके सिर ऊपर तू स्वामी
सो दुख कैसा पावे
जिसके सिर ऊपर तू स्वामी
सो दुख कैसा पावे

राजे नु कद मंगण लाड़े
कद तू किसनु राज थमा दे
तू ही जाने माया तेरी
कद तू आम तों खास बनादे
कद तू आम तों खास बनादे

डुबदी बेढ़ी वी पार लगावे
जे तू सतगुरु छावे
जिसके सिर ऊपर तू स्वामी
सो दुख कैसा पावे
जिसके सिर ऊपर तू स्वामी
सो दुख कैसा पावे

वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु
वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु

आपने आपने भागण दा जाणा आपने भागण दा
नीयत क्यूँ मारही करनी जब खाना आपने भागण दा
तेरी लीला नियारी ए तू सांभी दुनिया सारी ए
तेरे करके चली जंदी साड़ी दुनियादारी ए

तू दुख भंजन तू सुख दाता
तू ही पिता ए तू ही माता
जो वि मिल्या सब सिर मथे
किथो दाता किथे लियता

जो जी तेरा ध्यान जपे जो
दिल तों तेरा नाम जपे जो
जपे जो बाणी हरपल तेरी
तेनु सुबह ते शाम जपे जो

किसे चीज़ दी वि थोड़ नहीं उस नु
शुकर जो तेरा गावे
जिसके सिर ऊपर तू स्वामी
सो दुख कैसा पावे
जिसके सिर ऊपर तू स्वामी
सो दुख कैसा पावे


भजन का भावार्थ (सरल शब्दों में)


इस भजन का मूल भाव यह है कि जिस व्यक्ति के सिर पर भगवान का हाथ होता है, उसे कभी कोई दुख नहीं छू सकता।
जो व्यक्ति सच्चे मन से प्रभु की शरण में आता है, उसके सारे कष्ट भगवान स्वयं दूर कर देते हैं।

भजन में बताया गया है कि:

  • ईश्वर ही सबका पालन करने वाला है
  • वही किसी को राजा बना देता है और किसी को साधारण
  • उसकी माया और उसकी लीला अपार है
  • वह डूबती हुई नैया को भी पार लगा देता है

भजन यह भी सिखाता है कि मनुष्य को अपने भाग्य और परिस्थितियों पर रोना नहीं चाहिए, बल्कि ईश्वर की इच्छा को स्वीकार करना चाहिए।
जो व्यक्ति हर परिस्थिति में प्रभु का नाम जपता है, उसे किसी भी वस्तु की कमी नहीं रहती।

भजन का सार यही है कि — 👉 जो ईश्वर पर भरोसा करता है, उसका जीवन अपने आप सुखमय हो जाता है।
👉 ईश्वर ही माता है, पिता है और सच्चा सहारा है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


1. “सो दुख कैसा पावे” भजन किस पर आधारित है?

यह भजन ईश्वर की शरणागति, विश्वास और भक्ति पर आधारित है।

2. यह भजन किसने लोकप्रिय किया है?

इस भजन को विशेष रूप से जया किशोरी जी की मधुर वाणी से प्रसिद्धि मिली है।

3. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

👉 जिसके ऊपर भगवान की कृपा हो, उसे कोई दुख नहीं हो सकता।

4. यह भजन कब सुनना या गाना लाभकारी होता है?

✔️ मन अशांत हो
✔️ जीवन में परेशानियाँ हों
✔️ सत्संग या भजन संध्या में
✔️ सुबह-शाम ध्यान के समय

5. इस भजन से क्या लाभ मिलता है?

  • मन को शांति मिलती है
  • नकारात्मक सोच दूर होती है
  • ईश्वर पर विश्वास मजबूत होता है
  • जीवन में संतोष और स्थिरता आती है

निष्कर्ष

“सो दुख कैसा पावे” केवल एक भजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश है। यह हमें सिखाता है कि जब हम ईश्वर को अपने जीवन का कर्ता-धर्ता मान लेते हैं, तब दुख अपने आप दूर हो जाते हैं और मन सदा शांत रहता है।
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