छम छम नाच रही माँ काली लिरिक्स, Cham Cham Nach Rahi Mahakali Lyrics

“छम छम नाच रही माँ काली” माँ काली के रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन करने वाला एक प्रभावशाली देवी भजन है। इस भजन में माँ काली को अधर्म और दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली आदिशक्ति के रूप में दिखाया गया है।

भजन में युद्धभूमि का दृश्य, दानवों का विनाश और माँ के दिव्य नृत्य का अद्भुत चित्रण मिलता है। यह केवल भय का नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा और भक्तों की सुरक्षा का प्रतीक है। माँ काली का यह रूप बताता है कि जब अन्याय बढ़ता है, तब शक्ति स्वयं प्रकट होकर संतुलन स्थापित करती है।
यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, काली पूजा, जागरण और शक्ति भजन संध्या में गाया जाता है।

Cham Cham Nach Rahi Mahakali Lyrics

छम छम नाच रही माँ काली लिरिक्स


रकत बीज का वध करने को लेकर खप्पर खाली,
छम छम नाच रही माँ काली,
काली काली लट भिखरा के पी के मधु की प्याली,
छम छम नाच रही माँ काली,

जीब लटक रही मुख से बहार नैन से बरसे ज्वाला
छके छुटेदुश्मन दल के देख रूप विकराला
चंड मुंड का मुंड काट के गले में माला डाली
छम छम नाच रही माँ काली,

चाल चाले जब काली मैया घुंघरू छन छन बोले
सुन किलकारी काली माँ की धरती अम्बर धोले
पलक जपक के रन भूमि में वही खून की नाली
छम छम नाच रही माँ काली,

जब गुस्से में आकर माँ ने दुसमन का सिर काटा
एक बूंद न गिरी लहू की सब ख्प्पर में दांता,
लिखे अनाडी परवीन दाता माँ की महिमा निराली
छम छम नाच रही माँ काली,



भावार्थ (सरल शब्दों में)


इस भजन में माँ काली को दानवों का संहार करने के लिए रणभूमि में उतरते हुए दिखाया गया है। वे रौद्र रूप धारण करके राक्षसों का विनाश करती हैं और धर्म की रक्षा करती हैं। उनके बिखरे केश, ज्वाला समान नेत्र और गले की मुंडमाला शक्ति और न्याय का प्रतीक हैं।

माँ का नृत्य यह दर्शाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सत्य और धर्म की ही विजय होती है। रक्तबीज जैसे दानव का वध यह संदेश देता है कि अधर्म बार-बार जन्म ले सकता है, लेकिन दिव्य शक्ति उसे समाप्त करने के लिए सदैव उपस्थित रहती है।

यह भजन भक्त को निर्भय बनाता है और विश्वास दिलाता है कि माँ काली अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर रूप धारण करती हैं।

FAQ – छम छम नाच रही माँ काली भजन


1. यह भजन किस देवी पर आधारित है?

यह भजन माँ काली के रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप पर आधारित है।

2. यह भजन कब गाया जाता है?

यह भजन नवरात्रि, काली पूजा, जागरण और शक्ति उपासना के समय गाया जाता है।

3. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का संदेश है कि धर्म की रक्षा के लिए दिव्य शक्ति सदैव सक्रिय रहती है।

4. माँ काली का नृत्य क्या दर्शाता है?

यह नृत्य बुराई के अंत और सत्य की विजय का प्रतीक है।

5. इस भजन को सुनने से क्या अनुभूति होती है?

इस भजन से साहस, शक्ति और देवी पर अटूट विश्वास उत्पन्न होता है।

निष्कर्ष


“छम छम नाच रही माँ काली” भजन माँ काली की अपार शक्ति और दिव्य स्वरूप का अद्भुत वर्णन करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि जब जीवन में भय और संकट बढ़ते हैं, तब माँ की शरण ही सबसे बड़ा सहारा बनती है। उनकी कृपा से भक्त निर्भय होकर धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
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