“करना सेवा सत्कार, करना हर किसी से प्यार” एक प्रेरणादायक और नैतिक शिक्षा देने वाला भजन है, जो हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखाता है। इस भजन में भक्ति के साथ-साथ मानवता, विनम्रता, मधुर वाणी और अच्छे कर्मों का महत्व समझाया गया है।
भजन बताता है कि सच्ची पूजा केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि लोगों के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करने में है। सेवा, सद्भाव और सत्य के मार्ग पर चलना ही ईश्वर को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है। यह भजन सुनने वाले को आत्मचिंतन करने और अपने व्यवहार को सुधारने की प्रेरणा देता है।
यह भजन विशेष रूप से सत्संग, भजन संध्या, आध्यात्मिक प्रवचन और सामाजिक आयोजनों में गाया जाता है।

करना सेवा सत्कार करना हर किसी से प्यार लिरिक्स
करना सेवा सत्कार, करना हर किसी से प्यार,
न कभी भी किसी का दिल दुखाना रे ।
लेके जग से बुराई मत जाना रे,
अच्छे कर्मो से जीवन सजाना रे ।
घर आये को भगवान् समझना,
अपने ही जैसा इंसान समझना ।
मीठी वाणी उसको बोल, वाणी होती है अनमोल ।
तीखी वाणी किसी को मत सुनाना रे ।
प्यार अपना सभी पे तू लुटाना रे ।
तुच्छ समझ किसी पर नहीं हंसना,
सब पे सम-रस भाव तुम रखना,
पढ़ना गीता का उपदेश, उसमे है जी ये सन्देश,
कहाँ रहता है एक सा ज़माना रे ।
भाव-भगति में मन को रमाना रे ।
पाप का धन अपने घर तू ना लाना,
खून-पसीने की रोटी ही खाना ।
मेहनत करना आठों याम, किरपा करेंगे तुझपे राम ।
सत्य-पथ से ना पग को डिगाना रे ।
बुरे कर्मों को हाँथ ना लगाना रे ।
मन में कभी तू अभिमान ना करना,
जग में किसी का अपमान ना करना ।
ऊपर होगा सब हिसाब, दोगे कैसे तुम जवाब,
फिर तुझको पड़ेगा पछताना रे ।
रह जायेगा यहीं पर खजाना रे ।
करना सेवा सत्कार, करना हर किसी से प्यार,
न कभी भी किसी का दिल दुखाना रे ।
लेके जग से बुराई मत जाना रे,
अच्छे कर्मो से जीवन सजाना रे ।
करना सेवा सत्कार, करना हर किसी से प्यार,
न कभी भी किसी का दिल दुखाना रे ।
भावार्थ (सरल शब्दों में)
इस भजन का संदेश है कि मनुष्य को हर व्यक्ति से प्रेम और सम्मान के साथ व्यवहार करना चाहिए। जो भी हमारे घर आए, उसे भगवान का रूप मानकर आदर देना चाहिए और हमेशा मीठी वाणी बोलनी चाहिए, क्योंकि शब्दों में बहुत शक्ति होती है।
भजन यह भी सिखाता है कि किसी का मज़ाक उड़ाना या अभिमान करना गलत है। जीवन में ईमानदारी से मेहनत करके कमाया हुआ अन्न ही श्रेष्ठ होता है। पाप से कमाया धन कभी सुख नहीं देता। भगवान श्रीराम की कृपा उसी पर होती है जो सत्य और धर्म के मार्ग पर चलता है।
अंत में भजन हमें याद दिलाता है कि इस संसार का धन और वैभव यहीं रह जाता है, इसलिए अच्छे कर्म ही जीवन की असली पहचान बनते हैं।
FAQ – करना सेवा सत्कार भजन
1. यह भजन किस विषय पर आधारित है?
यह भजन मानवता, अच्छे कर्म, विनम्रता और प्रेमपूर्ण जीवन जीने की शिक्षा पर आधारित है।
2. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का मुख्य संदेश है कि सेवा, प्रेम और सत्य का मार्ग ही सच्ची भक्ति है।
3. यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन सत्संग, प्रवचन, भजन संध्या और सामाजिक धार्मिक कार्यक्रमों में गाया जाता है।
4. इस भजन से क्या सीख मिलती है?
यह भजन सिखाता है कि मीठी वाणी बोलें, अभिमान छोड़ें, मेहनत से जीवन चलाएँ और सभी से प्रेम करें।
5. भजन में अच्छे कर्मों पर इतना जोर क्यों दिया गया है?
क्योंकि अंत समय में केवल कर्म ही मनुष्य के साथ जाते हैं, धन या पद नहीं।
निष्कर्ष
“करना सेवा सत्कार करना हर किसी से प्यार” भजन हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और कर्मों में दिखाई देती है। प्रेम, सेवा, विनम्रता और सत्य का मार्ग अपनाकर ही जीवन को सुंदर और सार्थक बनाया जा सकता है। यही भजन का वास्तविक संदेश है — इंसानियत ही सबसे बड़ी पूजा है।