सोच के निकला था तेरे से सब कुछ मांगूगा लिरिक्स, Soch Ke Nikla Tha Tere Se Sab Kuch Manguga Lyrics

" सोच के निकला था तेरे से सब कुछ मांगूगा " भजन माँ झंडेवाली के प्रति भक्त के भीतर चल रहे द्वंद्व और अंतिम समर्पण को अत्यंत सुंदर ढंग से व्यक्त करता है। भक्त जब माँ के दरबार की ओर निकलता है, तो उसके मन में संसार की अनेक इच्छाएँ होती हैं—संतान, धन, यश और लंबी आयु। लेकिन जैसे ही वह माँ के सामने पहुँचता है, उसकी सारी माँगें अपने आप मिट जाती हैं।

माँ के दर्शन मात्र से भक्त को यह अनुभव होता है कि सबसे बड़ी प्राप्ति माँ स्वयं हैं। भजन यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति में इच्छाएँ नहीं रहतीं, वहाँ केवल माँ की उपस्थिति, कृपा और सान्निध्य ही पर्याप्त होते हैं। यही कारण है कि यह भजन सुनते ही मन शांत हो जाता है और आत्मा माँ की शरण में झुक जाती है।

Soch Ke Nikla Tha Tere Se Sab Kuch Manguga Lyrics

सोच के निकला था तेरे से सब कुछ मांगूगा लिरिक्स


सोच के निकला था तेरे से सब कुछ मांगूगा,
ये भी मांगूगा तेरे से वो भी मांगूगा,
लेकिन जब तेरे सामने आया सब कुछ भूल गया,
मुझे याद रही बस तू ही तू माँ झंडेवाले तू ही तू ॥

खाली झोली लेके गया था मैया मैं तेरे दर पे,
बड़ी बड़ी फर्यादे थी जब निकला था घर से,
बेटा मंगू गा तेरे से बेटी मंगू गा,
मेहरो भरे खजाने वाली पेटी मंगू गा,
लेकिन जब तेरे सामने आया सब कुछ भूल गया,
मुझे याद रही बस तू ही तू माँ झंडेवाले तू ही तू ॥

क्या मांगू क्या न मांगू मैं फेंसला कर न पाया,
मैंने सोचा मांग लूँगा मैं जो भी मन में आया,
शोरत मांगू गा तेरे से दोलत मांगू गा,
लम्बी उम्र को पाने की मैं मोहलत मांगू गा,
लेकिन जब तेरे सामने आया सब कुछ भूल गया,
मुझे याद रही बस तू ही तू माँ झंडेवाले तू ही तू ॥

मुझे पता था मैया दर से खाली नही लोटाती,
देना होता है जब माँ ने तभी वो हमे भुलाती,
दर्शन मांगू गा मैया से किरपा मांगू गा,
मैया मैं तेरे दर से अब तुझको मांगू गा,
लेकिन जब तेरे सामने आया सब कुछ भूल गया,
मुझे याद रही बस तू ही तू माँ झंडेवाले तू ही तू ॥



भजन का भावार्थ (सरल और स्पष्ट)


इस भजन का भावार्थ यह है कि भक्त माँ के दरबार में बहुत कुछ माँगने की तैयारी करके जाता है। वह सोचता है कि माँ से संतान, धन, प्रतिष्ठा और लंबी उम्र जैसी अनेक इच्छाएँ रखेगा।
परंतु जैसे ही वह माँ के सामने खड़ा होता है, उसे यह बोध हो जाता है कि ये सभी इच्छाएँ क्षणिक और तुच्छ हैं।

माँ का दर्शन होते ही भक्त का मन बदल जाता है और उसे केवल माँ ही माँ दिखाई देती हैं। तब वह किसी वस्तु की नहीं, बल्कि माँ की कृपा, दर्शन और स्वयं माँ को ही पाने की प्रार्थना करता है।
भजन हमें सिखाता है कि जब भक्ति सच्ची हो जाती है, तब माँ की उपस्थिति ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति बन जाती है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


1. यह भजन किसे समर्पित है?

यह भजन माँ झंडेवाली (माता रानी) को समर्पित है।

2. इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

👉 इच्छाओं से समर्पण की यात्रा
भक्त माँ से कुछ माँगने जाता है, लेकिन अंत में माँ को ही माँग बैठता है।

3. यह भजन कब गाना या सुनना शुभ माना जाता है?

✔️ नवरात्रि
✔️ जगराता और चौकी
✔️ माता के दर्शन या व्रत के समय
✔️ जब मन अशांत हो

4. यह भजन हमें क्या शिक्षा देता है?

यह भजन सिखाता है कि:
संसार की इच्छाएँ अस्थायी हैं
माँ की कृपा ही सबसे बड़ी दौलत है
सच्ची भक्ति में माँग नहीं, केवल समर्पण होता है

5. क्या यह भजन नए भक्तों के लिए उपयुक्त है?

हाँ, यह भजन सरल शब्दों, गहरे भाव और हृदयस्पर्शी संदेश के कारण नए और पुराने सभी भक्तों के लिए उपयुक्त है।
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