“तुम्ही मेरी नैया, किनारा तुम्ही हो” एक अत्यंत भावपूर्ण और आत्मसमर्पण से भरा भक्ति भजन है। इस भजन में भक्त अपने जीवन को एक डगमगाती नाव मानता है और ईश्वर को उसका एकमात्र सहारा, मार्गदर्शक और उद्धारकर्ता स्वीकार करता है।
यह भजन इस भाव को दर्शाता है कि संसार रूपी सागर में मनुष्य अकेला और असहाय है, लेकिन जब वह प्रभु की शरण में आता है, तो वही प्रभु उसकी नैया को सुरक्षित किनारे तक पहुँचा देते हैं।
भजन में विश्वास, समर्पण और पूर्ण आस्था की भावना अत्यंत सुंदर रूप से व्यक्त होती है।

तुम्ही मेरी नईया किनारा तुम्ही हो लिरिक्स
तुम्ही मेरी नईया किनारा तुम्ही हो
मेरी जिंदगी का सहारा तुम्ही हो
तुम्ही मेरी नईया किनारा तुम्ही हो ॥
ये नर तन का चोला बनाया है तुमने
सभी अंग ढंग से सजाया है तुमने
तुम्ही मेरी नज़रे नज़ारा तुम्ही हो
मेरी जिन्दगी का सहारा तुम्ही हो ॥
तुम्ही सुर्य बनकर चमकते हो प्यारे
तुम्ही बिजली बनकर कडकते हो प्यारे
तुम्ही चाद तारें सितारा तुम्हीं हो
मेरी जिन्दगी का सहारा तुम्हीं हो ॥
तुम्ही बिजली बनकर कडकते हो प्यारे
तुम्ही चाद तारें सितारा तुम्हीं हो
मेरी जिन्दगी का सहारा तुम्हीं हो ॥
तुम्ही बनके बादल बरसते हो प्यारे
तुम्ही फुल बनकर महकते हो प्यारे
नदी सिन्धु सागर की धारा तुम्हीं हो
मेरी जिन्दगी का सहारा तुम्हीं हो ॥
कृपा कुप करुणा सभी काम तेरे
सभी रूप तेरे सभी नाम तेरे
यति भिक्षु सदगुरू हमारा तुम्हीं हो
मेरी जिन्दगी का सहारा तुम्हीं हो ॥
भजन का भावार्थ (सरल शब्दों में)
इस भजन का भाव यह है कि— भक्त अपने जीवन की सारी जिम्मेदारी भगवान को सौंप देता है।
वह स्वीकार करता है कि न तो उसके पास कोई शक्ति है, न ज्ञान और न ही कोई और सहारा।
भगवान ही उसकी नैया भी हैं और किनारा भी,
यानि जीवन की यात्रा भी उन्हीं के सहारे है और मंज़िल भी वही हैं।
यह भजन हमें सिखाता है कि जब मनुष्य पूर्ण रूप से ईश्वर पर भरोसा कर लेता है, तो भय, चिंता और दुख अपने आप समाप्त हो जाते हैं।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. “तुम्ही मेरी नैया किनारा तुम्ही हो” भजन किस भाव पर आधारित है?
यह भजन समर्पण (शरणागति) और पूर्ण विश्वास के भाव पर आधारित है।
2. यह भजन किस भगवान को समर्पित है?
यह भजन ईश्वर के सार्वभौमिक स्वरूप को समर्पित है — इसे राम, कृष्ण, श्याम या नारायण किसी के लिए भी गाया जा सकता है।
3. यह भजन कब गाना या सुनना शुभ माना जाता है?
- ✔️ सत्संग और भजन संध्या में
- ✔️ ध्यान और साधना के समय
- ✔️ जब मन व्याकुल या परेशान हो
- ✔️ एकादशी या गुरुवार को
4. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
👉 ईश्वर ही हमारा एकमात्र सहारा है।
जब हम सब कुछ छोड़कर प्रभु की शरण में जाते हैं, तभी जीवन सुरक्षित और शांत बनता है।
5. क्या यह भजन नए भक्तों के लिए उपयुक्त है?
हाँ, यह भजन सरल शब्दों, गहरे भाव और आत्मिक शांति देने वाला है — नए और पुराने सभी भक्तों के लिए अत्यंत उपयुक्त।