“आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर” ब्रज क्षेत्र का एक अत्यंत प्रसिद्ध और पारंपरिक होली भजन है। इस भजन में नंदगांव से आए नटवर नंद किशोर यानी श्रीकृष्ण की होली खेलने की मस्ती, चंचलता और लोक-रंग का जीवंत चित्रण मिलता है।
भजन में ग्वाल-बालों की टोली, ढोल-ढप की गूंज, अबीर-गुलाल की बारिश और ब्रज की गलियों में मची धूम को बड़े ही रोचक और हास्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह भजन सुनते ही ऐसा लगता है मानो नंदगांव और ब्रज की होली आंखों के सामने सजीव हो उठी हो।
यह भजन विशेष रूप से फागुन माह, होली उत्सव, रासलीला और ब्रज भजन संध्या में बड़े उत्साह के साथ गाया जाता है।

आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर लिरिक्स
आयो नंदगांव से होली,
खेलन नटवर नंद किशोर,
नटवर नंद किशोर,
आयो छलिया माखन चोर,
आयो नंदगांव से होरी,
खेलन नटवर नंद किशोर ।।
तर्ज - अरे माखन की चोरी छोड़।
संग में ग्वाल बाल मस्ताने,
सजे स्वांग में ढप मनमाने,
बने सखा पर लगे जनाने,
भेट गुलाल हाथ पिचकारी,
छाए रहे चहुं ओर,
आयो नंदगांव से होरी,
खेलन नटवर नंद किशोर ।।
संघ झांझ ढप ढोल बजावत,
तरह तरह की गारी गावत,
होली है होली है शोर मचावत,
अबीर गुलाल उड़ावत,
लावत है ये भर भर बोर,
आयो नंदगांव से होरी,
खेलन नटवर नंद किशोर ।।
भीखम सखा फाग नहीं पावे,
पकड़ जनानौ साज सजावे,
घेर सकल सब नाच नचावे,
इत में घेरूं गली रंगीली,
उत साकली खोल,
आयो नंदगांव से होरी,
खेलन नटवर नंद किशोर ।।
यह है नंदगांव के पंडा,
गाय चरावे बीने कंडा,
आए लिन्हे ढाल प्रचंडा,
झंडा छीन लगाओ डंडा,
कर देओ भांडा फोड़,
आयो नंदगांव से होरी,
खेलन नटवर नंद किशोर ।।
आयो नंदगांव से होली,
खेलन नटवर नंद किशोर,
नटवर नंद किशोर,
आयो छलिया माखन चोर,
आयो नंदगांव से होरी,
खेलन नटवर नंद किशोर ।।
भावार्थ (सरल शब्दों में)
इस भजन में बताया गया है कि नंदगांव से नटवर नंद किशोर अपने सखाओं के साथ होली खेलने आए हैं। वे छलिया और माखनचोर हैं, जिनकी शरारतें पूरे ब्रज में मशहूर हैं। ग्वाल-बाल तरह-तरह के वेश बनाकर आते हैं, हाथों में पिचकारी और गुलाल लेकर चारों ओर रंग बिखेर देते हैं।
ढोल, ढप, झांझ और गालियों के साथ होली का शोर मचता है। कहीं गोपियों को पकड़कर रंग लगाया जा रहा है, कहीं गलियों में रंगों की बौछार हो रही है। यह होली केवल रंगों की नहीं, बल्कि हास्य, मस्ती और प्रेम की होली है।
भजन यह दर्शाता है कि ब्रज की होली में कोई बंधन नहीं होता — वहाँ हँसी है, ठिठोली है, अपनापन है और सबसे बढ़कर कृष्ण का आनंदमय स्वरूप है।
FAQ – आयो नंदगांव से होली खेलन भजन
1. यह भजन किस विषय पर आधारित है?
यह भजन ब्रज की पारंपरिक होली और श्रीकृष्ण की होली लीला पर आधारित है।
2. यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन फागुन माह, होली उत्सव, रासलीला और ब्रज भजन संध्या में गाया जाता है।
3. इस भजन की खासियत क्या है?
इस भजन की खासियत इसका लोक-रंग, हास्य, ठेठ ब्रज भाषा और जीवंत होली चित्रण है।
4. यह भजन किस प्रकार की भावना जगाता है?
यह भजन आनंद, उत्सव, मस्ती और कृष्ण प्रेम की भावना जगाता है।
5. क्या यह भजन सामूहिक रूप से गाने के लिए उपयुक्त है?
हाँ, यह भजन ढोलक, ढप और समूह गायन के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
निष्कर्ष
“आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर” भजन ब्रज की होली का जीवंत लोकचित्र है। यह भजन हमें बताता है कि भक्ति केवल गंभीरता नहीं, बल्कि आनंद और उल्लास से भी भरी हो सकती है। जब कृष्ण संग होली होती है, तो रंग केवल चेहरे पर नहीं, बल्कि मन और आत्मा पर भी चढ़ जाते हैं। यही ब्रज होली की सच्ची सुंदरता है।