मंगल भवन अमंगल हारी लिरिक्स | Mangal Bhawan Amangal Haari Lyrics

“मंगल भवन अमंगल हारी” एक अत्यंत प्रसिद्ध और पावन राम भजन / चौपाई है, जो रामचरितमानस से जुड़ी हुई है। इस पंक्ति में भगवान श्रीराम की महिमा का गुणगान किया गया है, जहाँ उन्हें मंगल का धाम और अमंगल का नाश करने वाला बताया गया है। यह चौपाई मन, वचन और कर्म से श्रीराम की शरण में जाने की प्रेरणा देती है।

यह भजन सुनते ही मन में शांति, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण यह भजन मंदिरों, सत्संगों, सुंदरकांड पाठ और शुभ कार्यों की शुरुआत में विशेष रूप से गाया जाता है। श्रीराम का नाम स्वयं में ही संकटों का नाश करने वाला माना गया है। 

Mangal Bhawan Amangal Haari Lyrics

Mangal Bhawan Amangal Haari Lyrics


राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम

मंगल भवन अमंगल हारी
द्रबहुसु दसरथ अजर बिहारी
राम सिया राम सिया राम

होइ है वही जो राम रच राखा
को करे तरफ़ बढ़ाए साखा
राम सिया राम सिया राम

धीरज धरम मित्र अरु नारी
आपद काल परखिये चारी
राम सिया राम सिया राम

जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू
सो तेहि मिलय न कछु सन्देहू
राम सिया राम सिया राम

जाकी रही भावना जैसी
प्रभु मूरति देखी तिन तैसी
राम सिया राम सिया राम

हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता
कहहि सुनहि बहुविधि सब संता
राम सिया राम सिया राम

रघुकुल रीत सदा चली आई
प्राण जाए पर वचन न जाई
राम सिया राम सिया राम

राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम


मंगल भवन अमंगल हारी ( भावार्थ )


मंगल भवन अमंगल हारी का भावार्थ यह है कि भगवान श्रीराम मंगल के धाम हैं और वे अपने भक्तों के जीवन से हर प्रकार के अमंगल, दुख और बाधा को दूर करने वाले हैं। जो व्यक्ति सच्चे मन से श्रीराम का स्मरण करता है, उसके जीवन में शुभता, शांति और सकारात्मकता का वास होता है।

यह पंक्ति हमें यह सिखाती है कि जब जीवन में संकट, भय या निराशा आए, तब राम नाम का सहारा ही सबसे बड़ा संबल बनता है। श्रीराम की शरण में जाने से मन निर्मल होता है और जीवन का मार्ग मंगलमय बनता है। 

मंगल भवन अमंगल हारी ( पर संक्षिप्त लेख )


रामचरितमानस की यह पावन पंक्ति भारतीय भक्ति परंपरा का एक अमूल्य रत्न है। इसमें भगवान श्रीराम को करुणा, मर्यादा और कल्याण का प्रतीक बताया गया है। इसी कारण यह पंक्ति शुभ कार्यों, सुंदरकांड पाठ और धार्मिक आयोजनों में श्रद्धा से उच्चारित की जाती है।

यह चौपाई हमें विश्वास दिलाती है कि श्रीराम केवल पूजनीय नहीं, बल्कि जीवन के मार्गदर्शक हैं। उनके नाम का स्मरण मन को शांति देता है और व्यक्ति को सत्य, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
संक्षेप में, यह पंक्ति हमें सिखाती है कि राम नाम में ही जीवन का वास्तविक मंगल छिपा है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


1. “मंगल भवन अमंगल हारी” किससे संबंधित है?

यह पंक्ति गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस से संबंधित है और भगवान श्रीराम की स्तुति है।

2. इस चौपाई का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है कि भगवान श्रीराम मंगल के स्रोत हैं और वे अपने भक्तों के जीवन से हर अमंगल और संकट को दूर कर देते हैं।

3. यह भजन कब गाना या सुनना शुभ माना जाता है?

✔️ सुंदरकांड पाठ के समय
✔️ राम नवमी
✔️ सत्संग और भजन संध्या
✔️ किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में

4. इस चौपाई का मुख्य संदेश क्या है?

👉 श्रीराम की शरण में जाने से जीवन मंगलमय होता है
उनका नाम लेने से भय, दुख और नकारात्मकता दूर होती है।

5. क्या यह भजन सभी के लिए उपयुक्त है?

हाँ, यह भजन बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों — सभी के लिए समान रूप से कल्याणकारी और प्रेरणादायक है।
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