“मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा” एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण शिव भजन है, जो सच्ची भक्ति का वास्तविक अर्थ समझाता है। यह भजन बताता है कि ईश्वर को पाने के लिए बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि शुद्ध मन और सच्चा भाव ही पर्याप्त होता है।
इस भजन में भगवान शिव को जीवन का आधार बताया गया है और यह समझाया गया है कि जब मन ही मंदिर बन जाए, तो पूजा अपने आप सफल हो जाती है। शिव को सत्यम, शिवम और सुंदरम कहकर उनके दिव्य स्वरूप की महिमा का गुणगान किया गया है।
यह भजन विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास, सोमवार व्रत और शिव भक्ति के समय गाया जाता है।


मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा लिरिक्स
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
सत्य है ईश्वर, शिव है जीवन,
सुन्दर यह संसार है ।
तीनो लोक हैं तुझमे,
तेरी माया अपरम्पार है ॥
ॐ नमः शिवाय नमो, ॐ नमः शिवाय नमो
मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा,
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा ।
बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुंदरम,
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गए जा ॥
पार्वती जब सीता बन कर, जय श्री राम के सन्मुख आयी,
राम ने उनको माता कह कर, शिव शंकर की महिमा गायी ।
शिव भक्ति में सब कुछ सुझा, शिव से बढ़कर नहीं कोई दूजा,
बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुंदरम,
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गए जा ॥
तेरी जटा से निकली गंगा और गंगा ने भीष्म दिया है,
तेरे भक्तो की शक्ति ने सारे जगत को जीत लिया है ।
तुझको सब डिवॉन ने पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा,
बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुंदरम,
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गए जा ॥
भावार्थ (सरल शब्दों में)
इस भजन का भाव यह है कि भगवान शिव ही सत्य हैं, वही जीवन हैं और उन्हीं से यह संसार सुंदर बना है। जब मनुष्य अपने मन को पवित्र बना लेता है, तब वही मन शिव का मंदिर बन जाता है और हर सांस पूजा बन जाती है।
भजन में बताया गया है कि शिव की महिमा तीनों लोकों में फैली हुई है। माता पार्वती भी जब सीता के रूप में प्रभु श्रीराम के सामने आईं, तब उन्होंने भी शिव की महिमा का गुणगान किया। शिव की जटाओं से निकली गंगा, उनके भक्तों की शक्ति और उनकी करुणा पूरे संसार को पवित्र करती है।
यह भजन सिखाता है कि—
- सच्ची भक्ति मन से होती है
- शिव सबसे महान हैं
- उनका स्मरण जीवन को पवित्र बना देता है
- भक्ति से ही आत्मिक शांति मिलती है
FAQ – मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा भजन
1. यह भजन किस भाव पर आधारित है?
यह भजन आत्मिक भक्ति, श्रद्धा और शिव के प्रति पूर्ण समर्पण पर आधारित है।
2. यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, शिव पूजा और भजन संध्या में गाया जाता है।
3. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का संदेश है कि सच्ची पूजा मन से होती है, न कि केवल बाहरी कर्मकांड से।
4. इस भजन से क्या लाभ होता है?
इस भजन को गाने या सुनने से मन शांत होता है, भक्ति बढ़ती है और आत्मा को शांति मिलती है।
5. “मन मेरा मंदिर” का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि जब मन पवित्र हो जाए, तो वही ईश्वर का सच्चा निवास बन जाता है।
निष्कर्ष
“मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा” भजन हमें यह सिखाता है कि ईश्वर को पाने के लिए दिखावे की नहीं, बल्कि सच्चे मन की आवश्यकता होती है। जब मन निर्मल हो जाता है, तब हर श्वास में शिव का वास होता है। यह भजन आत्मा को शांति, मन को स्थिरता और जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।