ओ पापी मन करले भजन लिरिक्स | O Papi Man Karle Bhajan Lyrics

“ओ पापी मन करले भजन” एक गहरा वैराग्य भजन है, जो मनुष्य को जीवन की सच्चाई का आईना दिखाता है। यह भजन सीधे मन से संवाद करता है और याद दिलाता है कि यह मानव जीवन बहुत दुर्लभ है और बार-बार नहीं मिलता।

भजन में समझाया गया है कि संसार केवल चार दिनों का मेला है। यहाँ कोई स्थायी नहीं है, न कोई सच्चा साथी। जब तक समय और अवसर मिला है, तब तक भजन, नाम सुमिरन और सत्कर्म कर लेना ही बुद्धिमानी है, क्योंकि अंत समय आने पर केवल कर्म और ईश्वर का नाम ही साथ जाते हैं।

यह भजन विशेष रूप से सत्संग, वैराग्य सभा, राम भजन संध्या और आध्यात्मिक प्रवचन में गाया जाता है।

O Papi Man Karle Bhajan Lyrics

ओ पापी मन करले भजन लिरिक्स


ओ पापी मन करले भजन,
मौका मिला है तो करले जतन ॥

जिसका मुझे था इंतजार,
ओ पापी मन करले भजन,
मौका मिला है तो करले जतन,
बाद में प्यारे पछताएगा जब,
पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥

चार दिनों का है जग का मेला,
कोई ना साथी संगी अकेला।
जैसा तू आया जग में वैसा ही तू जाएगा,
मुठ्ठी बाँध के आया जग में हाथ पसारे जाएगा,
हो बाद में प्यारे पछताएगा जब,
पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥

भाई बंधू कुटुंब कबीला,
ये तो जग का झूठा झमेला,
मरने के बाद तुझे आग में जलाएंगे,
तेरह दिनों का तेरा मातम मनाएंगे,
बाद में प्यारे पछताएगा जब,
पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥

राम नाम का सुमिरण करले,
राम जी का नाम प्यारे घट में धर ले,
राम जी का नाम प्यारे काम तेरे आएगा,
जीवन मरण से तू मुक्ति पा जायेगा,
बाद में प्यारे पछताएगा जब,
पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥


भावार्थ (सरल शब्दों में)


इस भजन में मन को “पापी मन” कहकर समझाया गया है कि अभी भी समय है, इसलिए भजन और ईश्वर स्मरण कर ले। जीवन एक अवसर है, जो बार-बार नहीं मिलता। जब शरीर रूपी पिंजरे से आत्मा रूपी पंछी उड़ जाएगा, तब पछताने का कोई लाभ नहीं होगा।

भजन यह सच्चाई बताता है कि संसार का सारा मोह, रिश्ते और वैभव केवल दिखावा हैं। जन्म के समय मनुष्य खाली हाथ आता है और मृत्यु के समय भी खाली हाथ ही जाता है। परिवार और संबंध कुछ दिनों तक शोक मनाते हैं, लेकिन अंत में आत्मा को अपने कर्मों का ही फल भोगना पड़ता है।

इसलिए भजन में बार-बार कहा गया है कि राम नाम का सुमिरण कर लो, क्योंकि वही नाम जीवन के हर मोड़ पर सहारा बनता है और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाता है।

FAQ – ओ पापी मन करले भजन


1. यह भजन किस विषय पर आधारित है?

यह भजन वैराग्य, आत्मचिंतन और ईश्वर भक्ति पर आधारित है।

2. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि जीवन अस्थायी है और समय रहते भजन व नाम सुमिरन कर लेना चाहिए।

3. यह भजन कब गाया जाता है?

यह भजन सत्संग, वैराग्य सभा, राम भजन संध्या और आध्यात्मिक आयोजनों में गाया जाता है।

4. इस भजन को सुनने से क्या अनुभूति होती है?

इस भजन को सुनने से मन भीतर तक झकझोर जाता है, आत्मचिंतन होता है और ईश्वर की ओर झुकाव बढ़ता है।

5. भजन में “पिंजरे से पंछी” किसका प्रतीक है?

यह आत्मा का प्रतीक है, जो मृत्यु के समय शरीर रूपी पिंजरे को छोड़ देती है।

निष्कर्ष


“ओ पापी मन करले भजन” केवल एक भजन नहीं, बल्कि जीवन का कठोर सत्य है। यह भजन हमें समय रहते चेतावनी देता है कि संसार के मोह में फँसकर जीवन व्यर्थ न गँवाएँ। यदि अभी भी राम नाम का स्मरण कर लिया जाए, तो जीवन सफल हो सकता है और आत्मा को शांति व मुक्ति प्राप्त होती है।
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