“रघुपति राघव राजाराम पतित पावन सीताराम” एक अत्यंत प्रसिद्ध और पावन राम भजन है, जो भगवान श्रीराम को मर्यादा, करुणा और करुणामय शरणदाता के रूप में स्मरण करता है। इस भजन में श्रीराम को पतित पावन कहा गया है—अर्थात् वे अपने शरणागत भक्तों का उद्धार करने वाले हैं।
यह भजन भारतीय भक्ति परंपरा में शांति, सद्भाव और सत्य का संदेश देता है और सामूहिक प्रार्थनाओं, सत्संगों व राम-नाम संकीर्तन में विशेष स्थान रखता है।


रघुपति राघव राजाराम पतित पावन सीताराम लिरिक्स
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥
सुंदर विग्रह मेघश्याम
गंगा तुलसी शालग्राम ॥
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥
भद्रगिरीश्वर सीताराम
भगत-जनप्रिय सीताराम ॥
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥
जानकीरमणा सीताराम
जयजय राघव सीताराम ॥
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥
भावार्थ (सरल शब्दों में)
इस भजन का भावार्थ यह है कि श्रीराम करुणा के सागर हैं और जो भी सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, वे उसका कल्याण करते हैं।
“पतित पावन” कहकर यह संदेश दिया गया है कि चाहे कोई कितना भी त्रुटिपूर्ण क्यों न हो, राम नाम का आश्रय उसे पवित्र कर देता है।
भजन हमें सिखाता है कि अहंकार छोड़कर, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलते हुए राम नाम का स्मरण ही जीवन को मंगलमय बनाता है।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. यह भजन किसे समर्पित है?
यह भजन भगवान श्रीराम को समर्पित है।
2. “पतित पावन” का क्या अर्थ है?
“पतित पावन” का अर्थ है—गिरे हुए या दोषयुक्त को पवित्र करने वाला। श्रीराम शरणागत भक्तों का उद्धार करते हैं।
3. यह भजन कब गाना या सुनना शुभ माना जाता है?
✔️ राम नवमी
✔️ सुंदरकांड/रामायण पाठ
✔️ सत्संग और प्रार्थना सभाएँ
✔️ प्रतिदिन राम नाम जप के समय
4. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
👉 राम नाम में उद्धार है
सत्य, करुणा और शरणागति से जीवन शांत और पवित्र बनता है।