जुलम कर डारयो सितम कर डारयो लिरिक्स | Julam Kar Daro Sitam Kar Daro Lyrics

“जुलम कर डारयो सितम कर डारयो” एक अत्यंत मधुर और रस से भरा ब्रज होली भजन है, जिसमें श्रीकृष्ण और राधा रानी की होली लीला का सुंदर वर्णन मिलता है। यह भजन ब्रज की उस अलौकिक होली को दर्शाता है जहाँ प्रेम, शरारत और भक्ति एक साथ दिखाई देते हैं।

इस भजन में श्रीकृष्ण की नटखट अदा, राधा रानी की लाज, सखियों की ठिठोली और रंग-गुलाल की मस्ती को बहुत ही मनमोहक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। “जुलम” और “सितम” जैसे शब्द यहाँ शिकायत नहीं, बल्कि प्रेम भरी शरारत का प्रतीक हैं।

यह भजन विशेष रूप से फागुन मास, ब्रज होली, रासलीला और होली महोत्सव में गाया जाता है और सुनते ही मन आनंद से भर जाता है।

Julam Kar Daro Sitam Kar Daro Lyrics

जुलम कर डारयो सितम कर डारयो लिरिक्स


दोहा – राधा आई सखियाँ आई,
लेकर रंग गुलाल,
काले रे काले कान्हा ने,
कैसो कर दियो लाल।

जुलम कर डारो सितम कर डारो,
काले ने कर दियो लाल,
जुलम कर डाल्यो ॥

आयो नज़र मोहन मतवारो,
राधा जी कर्यो इशारो,
नैना सु कर्यो कमाल,
जुलम कर डाल्यो,
काले ने कर दियो लाल,
जुलम कर डाल्यो ॥

सब घेर लियो ब्रजनारी,
नखरारी कामनगारी,
के चली गजब की चाल,
जुलम कर डाल्यो,
काले ने कर दियो लाल,
जुलम कर डाल्यो ॥

काजल टिकी नथ ल्याई,
अंगिया साड़ी पहनाई,
मुखड़े पे मल्यो गुलाल,
जुलम कर डाल्यो,
काले ने कर दियो लाल,
जुलम कर डाल्यो ॥

लियो पकड़ बिहारी कसके,
रंग दियो खुब हस हस के,
बोली फिर अइयो नंदलाल,
जुलम कर डाल्यो,
काले ने कर दियो लाल,
जुलम कर डाल्यो ॥

जुलम कर डारो सितम कर डारयो,
काले ने कर दियो लाल,
जुलम कर डाल्यो ॥


भजन का भावार्थ (सरल शब्दों में)


इस भजन का भाव यह है कि श्रीकृष्ण अपनी मस्ती और प्रेम में राधा रानी को रंगों से सराबोर कर देते हैं। राधा रानी कभी लाज से, कभी मुस्कान से और कभी हल्की सी शिकायत के साथ कृष्ण की शरारतों को स्वीकार करती हैं।

यहाँ “जुलम” और “सितम” शब्दों का अर्थ कोई दुख नहीं, बल्कि प्रेम में डूबी चंचलता और अपनापन है। कृष्ण राधा को रंग लगाते हैं, हँसते हैं, छेड़ते हैं और राधा उसी प्रेम में रंग जाती हैं।
भजन यह संदेश देता है कि — 👉 ईश्वर के साथ प्रेम भी भक्ति का ही रूप है
👉 भक्ति में आनंद, हँसी और उल्लास होना चाहिए
👉 राधा-कृष्ण की लीला जीवन को उत्सव बना देती है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


1. यह भजन किस पर आधारित है?

यह भजन श्रीकृष्ण और राधा रानी की होली लीला पर आधारित है।

2. यह भजन कब गाया जाता है?

यह भजन विशेष रूप से फागुन माह में, होली के उत्सव के दौरान, ब्रज की पारंपरिक होली में तथा रासलीला और भजन संध्या जैसे धार्मिक आयोजनों में बड़े उत्साह और भक्ति के साथ गाया जाता है।

3. इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव प्रेम, शरारत और भक्ति का संगम है, जहाँ कृष्ण और राधा का प्रेम होली के रंगों में झलकता है।

4. क्या यह भजन नृत्य या सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त है?

हाँ, यह भजन ब्रज नृत्य, होली महोत्सव और सांस्कृतिक मंचनों के लिए अत्यंत लोकप्रिय है।

5. इस भजन से क्या सीख मिलती है?

यह भजन सिखाता है कि भक्ति केवल गंभीरता नहीं होती, बल्कि उसमें प्रेम, आनंद और जीवन का उत्सव भी होना चाहिए।

निष्कर्ष


“जुलम कर डारयो सितम कर डारयो” एक ऐसा भजन है जो राधा-कृष्ण की प्रेमलीला को जीवंत कर देता है। यह भजन न केवल होली के रंगों को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि ईश्वर से जुड़ना प्रेम और आनंद के साथ होना चाहिए।
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