“हरे तीन पत्तो में क्या बल है” भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन है, जिसमें बेलपत्र की महिमा और भोलेनाथ की सरल भक्ति को सुंदर रूप में दर्शाया गया है।

इस भजन में बताया गया है कि भोलेनाथ को आडंबर नहीं, बल्कि सच्चा भाव प्रिय है। तीन पत्तों वाला बेलपत्र शिव को अत्यंत प्रिय है, क्योंकि वह त्रिदेव, त्रिगुण और त्रिकाल का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि शिव उस पर अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
भजन में यह भी दर्शाया गया है कि प्रकृति का हर कण — नदी, चंद्रमा, नाग, डमरू, भस्म — सब शिव भक्ति में लीन हैं। यही शिव की महिमा है कि पूरा ब्रह्मांड उनके रंग में रंगा हुआ है।
यह भजन विशेष रूप से सावन माह, महाशिवरात्रि, शिव पूजा और भजन संध्या में गाया जाता है।

हरे तीन पत्तो मे क्या बल है लिरिक्स
हरे तीन पत्तो मे क्या बल है जिसमे भोला मगन है,
भोला मगन है भोला मगन है,
हरे तीन पत्तो मे क्या बल है जिसमे भोला मगन है ॥
सरयु मगन है गोमती मगन है,
गंगा में ऐसा क्या बल है जिसमे भोला मगन है,
हरे तीन पत्तो मे क्या बल है जिसमे भोला मगन है ॥
सूरज मगन है तारे मगन है,
चंदा में ऐसा क्या बल है जिसमे भोला मगन है,
हरे तीन पतों मे क्या बल है जिसमे भोला मगन है ॥
बिच्छु मगन है ततैया मगन है,
नागो में ऐसा क्या बल है जिसमे भोला मगन है,
हरे तीन पत्तो मे क्या बल है जिसमे भोला मगन है ॥
ढोलक मगन है मजीरा मगन है,
डमरू में ऐसा क्या बल है जिसमे भोला मगन है,
हरे तीन पत्तो मे क्या बल है जिसमे भोला मगन है ॥
लड्डू मगन है पेड़ा मगन है
भाग धतूरे में ऐसा क्या बल है जिसमे भोला मगन है,
हरे तीन पत्तो मे क्या बल है जिसमे भोला मगन है ॥
शाल मगन है दुशाला मगन है,
बाघम्बर में ऐसा क्या बल है जिसमे भोला मगन है,
हरे तीन पत्तो मे क्या बल है जिसमे भोला मगन है ॥
गणपति मगन है कार्तिक मगन है,
गौरा में ऐसा क्या बल है जिसमे भोला मगन है,
हरे तीन पत्तो मे क्या बल है जिसमे भोला मगन है ॥
भावार्थ (सरल शब्दों में)
इस भजन का भाव यह है कि भोलेनाथ को भव्य चढ़ावे नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा प्रिय होती है। तीन पत्तों वाला बेलपत्र उनके लिए अत्यंत प्रिय है क्योंकि उसमें समर्पण, पवित्रता और भक्ति छिपी होती है।
भजन में बताया गया है कि गंगा, सरयू, चंद्रमा, सूर्य, नाग, डमरू, भस्म, भांग — सब भोलेनाथ की भक्ति में मग्न हैं। यह दर्शाता है कि शिव पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त हैं और हर वस्तु में उनका वास है।
भक्त यह प्रश्न करता है कि आखिर इन तीन पत्तों में ऐसा क्या बल है कि भोले बाबा उनमें मग्न हो जाते हैं — और उत्तर यही है कि जहाँ सच्चा भाव होता है, वहीं भगवान विराजते हैं।
FAQ – हरे तीन पत्तो में क्या बल है भजन
1. यह भजन किस पर आधारित है?
यह भजन भगवान शिव और बेलपत्र की महिमा पर आधारित है।
2. तीन पत्तों का क्या महत्व है?
तीन पत्ते त्रिदेव, त्रिगुण और त्रिकाल के प्रतीक माने जाते हैं और शिव को अत्यंत प्रिय हैं।
3. यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन सावन माह, महाशिवरात्रि, सोमवार व्रत और शिव भजन संध्या में गाया जाता है।
4. इस भजन से क्या सीख मिलती है?
यह भजन सिखाता है कि ईश्वर को सच्चा भाव चाहिए, दिखावा नहीं।
5. इस भजन को सुनने से क्या लाभ होता है?
इस भजन को श्रद्धा से सुनने या गाने पर मन को गहरी शांति का अनुभव होता है और भीतर की नकारात्मकता धीरे-धीरे दूर होने लगती है। शिव भक्ति का भाव प्रबल होता है, जिससे मन ईश्वर से जुड़ जाता है और हृदय श्रद्धा से भर उठता है। यह भजन आत्मा को सुकून देता है और मन को स्थिरता व सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
निष्कर्ष
“हरे तीन पत्तो में क्या बल है” भजन हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में वस्तु नहीं, भावना का महत्व होता है। जब मन श्रद्धा से भरा हो, तब एक छोटा सा बेलपत्र भी भोलेनाथ को प्रसन्न कर देता है। यही शिव भक्ति की सबसे बड़ी विशेषता है — सरलता, सच्चाई और समर्पण।