“ढोलक बाज रही मंदिर में, हमारो मन शंकर से लाग्यो” एक अत्यंत मधुर और भक्तिरस से भरा शिव भजन है। इस भजन में भक्त का मन पूरी तरह भोलेनाथ की भक्ति में लीन दिखाई देता है। मंदिर में बजती ढोलक की ताल, शिव नाम की गूंज और भक्ति का वातावरण — सब मिलकर मन को आनंद से भर देते हैं।

इस भजन में शिव और हनुमान जी के आगमन का सुंदर चित्रण किया गया है, जहाँ कैलाश से महादेव और सालासर से हनुमान जी भक्तों के बीच पधारते हैं। यह भजन बताता है कि जब सच्ची श्रद्धा होती है, तो स्वयं भगवान भक्तों के पास चले आते हैं।
यह भजन विशेष रूप से सावन माह, महाशिवरात्रि, मंदिरों की आरती और भजन संध्या में गाया जाता है।

ढोलक बाज रही मंदिर में हमारो मन शंकर से लाग्यो लिरिक्स
ढोलक बाज रही मंदिर में, हमारो मन शंकर से लाग्यो।
शंकर से लाग्यो हमारो मन शंकर से लाग्यो।
ढोलक बाज रही मंदिर में, हमारो मन शंकर से लाग्यो।
कहां से आए शिव शंकर जी कहां से आए हनुमान।
कैलाश से शिव शंकर आए सालासर हनुमान।
ढोलक बाज रही मंदिर में, हमारो मन शंकर से लाग्यो।
ढोलक बाज रही मंदिर में, हमारो मन शंकर से लाग्यो।
कहां पर उतरे शिव शंकर जी कहां पर यह हनुमान।
मंदिर में उतरे शिव शंकर जी चरणों में हनुमान।
ढोलक बाज रही मंदिर में, हमारो मन शंकर से लाग्यो।
ढोलक बाज रही मंदिर में, हमारो मन शंकर से लाग्यो।
क्या तो पहने सिंह शंकर जी क्या पहने हनुमान।
मृग छाला पहने शिव शंकर लाल लंगोटा हनुमान।
ढोलक बाज रही मंदिर में, हमारो मन शंकर से लाग्यो।
ढोलक बाज रही मंदिर में, हमारो मन शंकर से लाग्यो।
भावार्थ (सरल शब्दों में)
इस भजन का भाव यह है कि जब मंदिर में ढोलक बजती है और शिव का नाम लिया जाता है, तब भक्त का मन पूरी तरह भोलेनाथ में रम जाता है। शिव कैलाश से आते हैं और हनुमान जी उनके साथ भक्तों के बीच विराजते हैं।
भजन में बताया गया है कि शिव भस्म और मृगछाला धारण करते हैं, जबकि हनुमान जी लाल लंगोट में भक्तों के बीच रहते हैं। यह दर्शाता है कि ईश्वर सादगी में ही बसते हैं और उन्हें आडंबर नहीं, बल्कि भक्ति प्रिय है।
यह भजन हमें सिखाता है कि—
- सच्ची भक्ति से मन प्रभु में लग जाता है
- मंदिर का वातावरण आत्मा को शुद्ध करता है
- शिव भक्ति से जीवन में आनंद आता है
- श्रद्धा से किया गया स्मरण कभी व्यर्थ नहीं जाता
FAQ – ढोलक बाज रही मंदिर में भजन
1. यह भजन किस भाव पर आधारित है?
यह भजन शिव भक्ति, आनंद और मंदिर की भक्तिमय अनुभूति पर आधारित है।
2. यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन सावन महीने, महाशिवरात्रि, सोमवार व्रत और भजन संध्या में गाया जाता है।
3. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का संदेश है कि सच्चे मन से की गई भक्ति से मन ईश्वर में रम जाता है।
4. इस भजन को सुनने से क्या लाभ होता है?
इस भजन को सुनने से
मन शांत होता है
नकारात्मकता दूर होती है
भक्ति का भाव बढ़ता है
मन प्रसन्न रहता है
निष्कर्ष
“ढोलक बाज रही मंदिर में हमारो मन शंकर से लाग्यो” भजन हमें यह सिखाता है कि जब मन सच्ची श्रद्धा से शिव में लग जाता है, तब जीवन स्वयं आनंदमय हो जाता है। यह भजन भक्ति, उल्लास और आस्था का सुंदर संगम है, जो हर भक्त के हृदय को शिवमय कर देता है।