मेरी अखियों के सामने ही रहना – शेरों वाली जगदम्बे भजन | भावार्थ व अर्थ

“मेरी अखियों के सामने ही रहना” एक अत्यंत भावुक और करुणामयी माँ शेरोंवाली (जगदम्बा) की भक्ति रचना है। यह भजन एक भक्त के हृदय की पुकार है, जिसमें वह माँ से केवल इतना ही माँगता है कि वह उसकी आँखों के सामने बनी रहें, ताकि जीवन में कभी अकेलापन, डर या भटकाव न आए।

इस भजन में भक्त स्वयं को माँ का दास और बालक मानते हुए पूरी तरह उनकी शरण में सौंप देता है। यह भजन श्रद्धा, समर्पण, ममता और विश्वास का अनुपम संगम है।
नवरात्रि, जगराते और माता रानी की चौकी में यह भजन विशेष श्रद्धा से गाया जाता है।

मेरी अंखियों के सामने ही रहना ओ शेरोवाली जगदंबे लिरिक्स

मेरी अंखियों के सामने ही रहना ओ शेरोवाली जगदंबे लिरिक्स

 
मेरी अखियों के सामने ही रहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥
मेरी अखियों के सामने ही रहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥

हम तो हैं चाकर मैया तेरे दरबार के,
हम तो हैं चाकर मैया तेरे दरबार के ।
हम तो हैं चाकर मैया तेरे दरबार के,
हम तो हैं चाकर मैया तेरे दरबार के ॥

हम तो हैं चाकर मैया तेरे दरबार के,
भूखे हैं हम तो मैया तेरे ही प्यार के ।

मेरी अखियों के सामने ही रहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥

विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर माँ,
विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर माँ ।

विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर माँ,
विनती हमारी भी अब करो मंज़ूर माँ ।

चरणों से हमको कभी करना न दूर माँ ।

मेरी अखियों के सामने ही रहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ।

मुझे जान के अपना बालक सब भूल तू मेरी भुला देना,
मुझे जान के अपना बालक सब भूल तू मेरी भुला देना ।

मुझे जान के अपना बालक सब भूल तू मेरी भुला देना,
मुझे जान के अपना बालक सब भूल तू मेरी भुला देना ।

शेरों वाली जगदम्बे आँचल में मुझे छिपा लेना ॥
मेरी अखियों के सामने ही रहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ।

तुम ही हो शिव जी की शक्ति मैया शेरों वाली,
तुम ही हो शिव जी की शक्ति मैया शेरों वाली,
तुम ही हो शिव जी की शक्ति मैया शेरों वाली ॥

तुम ही हो दुर्गा हो अम्बे मैया तुम हो काली ।
बन के अमृत की धार सदा बहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥

मेरी अखियों के सामने ही रहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥

तेरे बालक को तभी माँ सबर आए,
तेरे बालक को तभी माँ सबर आए,
तेरे बालक को हाँ-हाँ, तेरे बालक को मैया ।
तेरे बालक को तभी माँ सबर आए
तेरे बालक को तभी माँ सबर आए ॥

जहाँ देखूं माँ तू ही तू नज़र आये ।
मुझे इसके सीवे कुछ ना कहना
ओ शेरों वाली जगदम्बे ।
मुझे इसके सीवे कुछ ना कहना
ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥

मेरी अखियों के सामने ही रहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥

देदो शर्मा को भक्ति का दान मैया जी,
देदो शर्मा को भक्ति का दान मैया जी ।

देदो शर्मा को भक्ति का दान मैया जी,
देदो शर्मा को भक्ति का दान मैया जी ॥

लक्खा गाता रहे तेरा गुणगान मैया जी ।
है भजन तेरा भक्तो का गहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ॥

मेरी अखियों के सामने ही रहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ।

मेरी अखियों के सामने ही रहना,
ओ शेरों वाली जगदम्बे ।


भजन का भावार्थ (सरल शब्दों में)


इस भजन का भाव यह है कि—

भक्त माँ से कोई धन, वैभव या पद नहीं माँगता,
वह केवल यह चाहता है कि माँ उसकी आँखों के सामने बनी रहें।

वह कहता है:

  • मैं तेरा सेवक हूँ
  • मैं तेरे प्यार का भूखा हूँ
  • मुझे अपने चरणों से कभी दूर मत करना
  • मुझे अपनी गोद में छुपा लेना

भक्त माँ को— 🔹 शिव शक्ति
🔹 दुर्गा
🔹 काली
🔹 जगदम्बा
के रूप में देखता है और मानता है कि माँ ही उसकी रक्षा करने वाली हैं।

भजन का सार यही है कि— 👉 जब माँ साथ होती हैं, तो डर नहीं रहता
👉 माँ की छाया में जीवन सुरक्षित हो जाता है
👉 माँ की भक्ति ही सबसे बड़ा आशीर्वाद है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


1. यह भजन किसे समर्पित है?

यह भजन माँ शेरोंवाली / माँ दुर्गा / जगदम्बा को समर्पित है।

2. इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

👉 माँ की शरण, ममता और निरंतर उपस्थिति की कामना
भक्त चाहता है कि माँ हमेशा उसकी आँखों के सामने रहें।

3. यह भजन कब गाया जाता है?

✔️ नवरात्रि
✔️ माता की चौकी
✔️ जगराता
✔️ व्यक्तिगत भक्ति के समय

4. इस भजन से हमें क्या सीख मिलती है?

✔️ माँ पर पूर्ण विश्वास
✔️ अहंकार का त्याग
✔️ सच्ची भक्ति में ही शांति
✔️ माँ की गोद ही सबसे सुरक्षित स्थान

5. यह भजन क्यों इतना लोकप्रिय है?

क्योंकि यह भजन हर भक्त की भावना को व्यक्त करता है —
कि माँ बस सामने रहें, वही पर्याप्त है।

निष्कर्ष


“मेरी अखियों के सामने ही रहना” केवल एक भजन नहीं, बल्कि हर भक्त के हृदय की आवाज़ है। यह भजन हमें सिखाता है कि माँ की कृपा के बिना जीवन अधूरा है और जब माँ साथ हो, तो कोई भय शेष नहीं रहता।

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